29 जुलाई 2019 - 13:48
इस्राईल के नए मीज़ाइल डिफ़ेंस सिस्टम के बारे में नेतनयाहू का दावा कितना सच है?

एक अरब समाचारपत्र ने इस्राईल के नए मीज़ाइल डिफ़ेंस सिस्टम के बारे में ज़ायोनी प्रधानमंत्री नेतनयाहू के दावे की समीक्षा की है।

अलबेना समाचारपत्र ने अपने लेख में लिखा है कि बेनयामिन नेतनयाहू ने जिन मीज़ाइलों का दावा किया है वे किसी भी स्थिति में सीरियाई सेना और फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध के मीज़ाइलों को रोकने में सक्षम नहीं है। पत्र का कहना है कि नेतनयाहू जनमत को धोखा देने के लिए इस प्रकार का दावा कर रहे हैं। ज़ायोनी प्रधानमंत्री ने दो दिन पहले घोषणा की थी कि कुछ सप्ताह पहले इस्राईल ने अलास्का राज्य में एक अत्याधुनिक मीज़ाइल डिफ़ेंस सिस्टम "हीत्स-3" का गुप्त रूप से परीक्षण किया है और परीक्षण विफल हो गया है। वास्तविकता यह है कि ज़ायोनी प्रधानमंत्री इस संबंध में निरंतर झूठ बोल रहे हैं।

 

  • प्रथम तो यह कि यह सिस्टम न तो गोपनीय है और न ही अत्याधुनिक बल्कि यह अमरीका की बोइंग कंपनी द्वारा बनाया गया है और इसे प्रक्षेपास्त्रिक ढाल के रूप में बनाया गया है। इस पर आने वाला 80 प्रतिशत ख़र्चा अमरीका ने सहन किया है। इस पर अब तक दो अरब चालीस करोड़ डाॅलर का ख़र्च आ चुका है जिसमें से दो अरब डाॅलर अमरीका ने दिया है।
  • दूसरे यह कि इस्राईल के युद्ध मंत्रालय की घोषणा के अनुसार इस मीज़ाइल सिस्टम का परीक्षण तकनीकी कारणों से टाल दिया गया है क्योंकि इसका परीक्षण मई में होने वाला था। इसी मंत्रालय की घोषणा के अनुसार इसका परीक्षण जारी साल के जनवरी महीने में इस्राईल में किया गया था  और वह सफल रहा था, तो फिर अमरीका के अलास्का राज्य में उसका गुप्त परीक्षण करने की क्या ज़रूरत थी और वह भी उस स्थिति में जब इस्राईली युद्ध मंत्रालय दो बार इस बात की घोषणा कर चुका है कि मीज़ाइल सिस्टम का परीक्षण दो बार विलंबित किया जा चुका है।
  • तीसरे यह कि जो कुछ अलास्का में हुआ वह इस्राईली जनमत को धोखा देने के लिए है ताकि नेतनयाहू उसे अपने चुनावी अभियान के लिए इस्तेमाल कर सकें। यह उसी प्रकार का झूठ है जो उन्होंने ईरान के परमाणु दस्तावेज़ों को चुराने के बारे में बोला था।
  • चौथे यह कि तकनीकी कारणों से इस मीज़ाइल सिस्टम का परीक्षण अलास्का में करने की कोई ज़रूरत ही नहीं थी क्योंकि इस सिस्टम के लिए जिस प्रकार के रडारों की ज़रूरत है वे बैतुल मुक़द्दस के पश्चिम में स्थित बैत शम्स काॅलोनी के निकट मौजूद हैं।

सैन्य टीकाकार यहां तक कि इस्राईल के सैन्य विशेषज्ञों ने भी नेतनयाहू का मज़ाक़ उड़ाया है क्योंकि वे इस्राईल और विश्व के जनमत के समक्ष यह सिद्ध करना चाहते हैं कि वे इस काल के "रैमबो" हैं और लम्बी मारक दूरी वाले मीज़ाइलों को तबाह कर सकते हैं। वास्तविकता यह है कि इस्राईल के अस्तित्व के लिए जो चीज़ ख़तरा है वह सऊदी अरब और इमारात के सैटेलाइट नहीं हैं बल्कि प्रतिरोधकर्ता बल हैं जो लेबनान व ग़ज़्ज़ा पट्टी में इस्राईल के बिलकुल निकट मौजूद हैं। इसी चीज़ ने ज़ायोनी जनरलों और नेतनयाहू की नींद उड़ा रखी है।

 

प्रतिरोधक बल हैफ़ा और याफ़ा से दूर नहीं हैं और केवल साठ किलो मीटर के फ़ासले पर हैं। इस फ़ासले के लिए उन मीज़ाइलों की कोई ज़रूरत नहीं है जिन्हें नेतनयाहू हीत्स-3 कह रहे हैं। कुल मिला कर यह कि यह मीज़ाइल सिस्टम सीरिया की सेना और प्रतिरोधक मोर्चे के मीज़ाइलों को रोकने में सक्षम नहीं होगा क्योंकि इस्राईल के सभी मीज़ाइल डिफ़ेंस सिस्टम पिछले साल के अंत में ग़ज़्ज़ा पट्टी से फ़ायर किए जाने वाले मीज़ाइलों को रोकने में फ़ेल हो चुके हैं और सभी ने देखा था कि नेतनयाहू उस दौरान युद्ध विराम के लिए किस प्रकार छटपटा रहे थे? (HN)

साभारः अरबी समाचारपत्र अलबेना